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कार्बन फुट प्रिंट क्या होता है?

कार्बन फुटप्रिंट वह मात्रा होती है जो किसी व्यक्ति, संगठन, उत्पाद या सेवा के प्रत्येक गतिविधि से निकलने वाले हरित गृह प्रभाव वाली गैसें (greenhouse gases) के प्रकार और मात्रा का मापन करती है। ये greenhouse gases, जैसे कि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मेथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), फ्लोरोकार्बन (HFCs), परफ्लोरोकार्बन (PFCs), और सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF6),आदि जब वायुमंडल में जमा होते हैं, तो ये धरती के तापमान को बढ़ाने में मदद करते हैं और जलवायु परिवर्तन (climate change) का कारण बनते हैं। व्यक्ति या संगठन के कार्बन फुटप्रिंट का मापन करके उन्हें उनके प्रतिबंध करने एवं प्रोत्साहन की आवश्यकता पर ध्यान देने में मदद मिलती है। इससे लोग अपने पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को बेहतर बनाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उपाय ढूंढने में सक्षम होते हैं। x

मांसाहार का जलवायु परिवर्तन क्या प्रभाव है?

मांसाहार का जलवायु परिवर्तन पर क्या प्रभाव है? इस प्रभाव को समझने के लिए हमें ये समझना आवश्यक है कि मांस का उत्पादन किस प्रकार होता है? बड़े स्केल पर मांस उत्पादन के लिए आपको आवश्यकता है ढ़ेर सारे जानवरों की, उनके लिए खाद्य पदार्थ की, खाद्य पदार्थ को उगाने के लिए खेती योग्य जमीन की, और बहुत ज्यादा मात्रा में जल की आदि। पहली बात समझने योग्य ये है कि किसी भी जानवर को मांस लायक बनाने के लिए एक समय अन्तराल में बहुत सारे भोजन और पानी की आवश्यकता होती है,क्यूंकि कोई भी जानवर खाने लायक पैदा होते ही नहीं बन जाता एक समय अंतराल वह तैयार होता है । कोई प्लेट में चावल दाल खाता है और दूसरी प्लेट में कोई मांस खाता है तो दोनों में जमीन आसमान का अन्तर है क्यूंकि जो मांस खा रहा है उसकी प्लेट में एक साथ बहुत सारा अनाज है जो लंबे अंतराल में उस जानवर को खिलाया गया है वह पूरा सम्मिलित है । वहीं जो दाल चावल खा रहा है उसमें मात्र उतना ही अनाज है जितना उस प्लेट में है। यहां से यह बात स्पष्ट होती है कि जब कोई मांस खाता है तो उसके लिए ज्यादा अनाज ,ज्यादा जमीन, और ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है । अब कुछ तथ्य ...

जलवायु परिवर्तन क्या है ?

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) एक प्रकार का पर्यावरणीय परिवर्तन है जिसमें पृथ्वी की जलवायु की दशा में देखे जाने वाले बदलाव को सम्मिलित करता है। परिवर्तन दो प्रकार हो सकते है एक सकारात्मक परिवर्तन और एक नकारात्मक परिवर्तन । लेकिन  हम यहाँ पर इस विषय पर लिखने को मजबूर हुये है इसके पीछे सीधा कारण है की जलवायु में होने वाले परिवर्तन का असर नकारात्मक है जिससे पूरी दुनिया पर खतरे  का संकट है।  जलवायु परिवर्तन से हमारा आशय यह है किसी समय अंतराल में हवाओं में ,तापमान में ,मौसमों में, परिवर्तन देखने को मिलता है कई बार इसके कारण प्राकृतिक होते हैं लेकिन आज हम जिस परिवर्तन की बात करेंगे उसके पीछे का कारण मनुष्य की गतिविधियां है और इस परिवर्तन के कारण हम बहुत बड़े विनाश के करीब पहुंच गए हैं । यह मानव गतिविधियों के कारण बढ़ी हुई ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव से उत्पन्न होता है। ये गैसेस मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मेथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), और फ्लोरोकार्बन (HFCs) आदि शामिल हैं। इन ग्रीन हाउस गैसों के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है वैज्ञानिकों का कहना है कि अग...