मांसाहार का जलवायु परिवर्तन क्या प्रभाव है?
मांसाहार का जलवायु परिवर्तन पर क्या प्रभाव है? इस प्रभाव को समझने के लिए हमें ये समझना आवश्यक है कि मांस का उत्पादन किस प्रकार होता है? बड़े स्केल पर मांस उत्पादन के लिए आपको आवश्यकता है ढ़ेर सारे जानवरों की, उनके लिए खाद्य पदार्थ की, खाद्य पदार्थ को उगाने के लिए खेती योग्य जमीन की, और बहुत ज्यादा मात्रा में जल की आदि। पहली बात समझने योग्य ये है कि किसी भी जानवर को मांस लायक बनाने के लिए एक समय अन्तराल में बहुत सारे भोजन और पानी की आवश्यकता होती है,क्यूंकि कोई भी जानवर खाने लायक पैदा होते ही नहीं बन जाता एक समय अंतराल वह तैयार होता है । कोई प्लेट में चावल दाल खाता है और दूसरी प्लेट में कोई मांस खाता है तो दोनों में जमीन आसमान का अन्तर है क्यूंकि जो मांस खा रहा है उसकी प्लेट में एक साथ बहुत सारा अनाज है जो लंबे अंतराल में उस जानवर को खिलाया गया है वह पूरा सम्मिलित है । वहीं जो दाल चावल खा रहा है उसमें मात्र उतना ही अनाज है जितना उस प्लेट में है। यहां से यह बात स्पष्ट होती है कि जब कोई मांस खाता है तो उसके लिए ज्यादा अनाज ,ज्यादा जमीन, और ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है । अब कुछ तथ्य ...